भोथर पेन्सिल सँ लिखल
बारह गोट कथा’क सँग्रह, जे आधुनिक मैथिल’क जीवन सँघर्ष केँ प्रदर्षित करैत अछि. प्रत्येक कथा शहर’क भागम-भाग सँ निकलैत अछि आ गाम’क कोनो कोनटी मे जा केँ खत्म होइत अछि. वा नहिँ तऽ गाम’क कोनो घर’क ड्योढ़ी सँ निकलि आधूनिक भारत’क कोनो मेट्रोपोलिटन शहर मे खत्म होइत अछि. किछु आओर चीज हो अथवा नहि, कथा मे विविधता, रहस्य, रोमान्च आ असलियत मौजूद अछि. पाठक केँ बोरियत नहि महसूस होयत एकर आश्वासन आ नास्टाल्जिक फीलिँग केँ आनबा मे मदद करत तकर उम्मीद.
अपने लोकनि केँ आश्वस्त काएल जा रहल अछि जे एहि पोथी’क आमदनी कोनो व्यक्तिगत काज मे नहि मुदा मैथिली साहित्य’क विकास मे खर्च होयत।
--आदि यायावर
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