ई पोथी किनबाक लेल पढ़ूकी बुझल अछि जे पचीस साल बाद मैथिली भाषा’क की होयत.कतेक लेखक बचत. कतेक पाठक बचत. मैथिली भाषा बहुते धनी भाषा अछि आ मानवता’क विकास मे एक महत्वपूर्ण योगदान केने अछि. एहि भाषा मेँ विलूप्त होएबा सँ बचाऊ. एहि पोथी केँ कीनू. एहि पोथी’क मूल्य सँ साहित्य सृजन’क प्रचार प्रसार मे खर्चा होयत. एहि समाजिक काज मे अपन योगदान करु. पोथी कीनबाक लेल एहि ई-मेल पर सम्पर्क करु: bhothar.pencil@vidyapati.org अपनेक स्वागत अछि.२००४ नवम्बर एक एहेन समय छल, जखन इन्टरनेट पर मैथिली भाषा’क उपस्थिति नहि छल. कतेक रास बात नामक मैथिली भाषा आ देवनागरी लिपि मे पहिल ब्लोग बनेलहुँ. पहिने अपने लिखैत रही आ पढ़ैत रही. बाद मे बहुत पाठक गण सँ परिचय भेल. २००७ मे मोन भेल जँ इन्टरनेट पर पाठक भेट गेल अछि, तँ किएक नहि मैथिली साहित्य’क सेवा काएल जाए. फेर दू टा शुरुआत केलहुँ. एकटा कथा सँग्रह (भोथर पेन्सिल सँ लिखल) आ फेर उपन्यास (जलकुम्ही). प्रस्तुत कथा-सँग्रह, "भोथर पेन्सिल सँ लिखल" बदलैत समाज मे मानवीय सम्बन्ध’क बदलाव पर आधारित अछि. कथा सँग्रह’क मुख्य थीम नव-विवाहित स्त्री थीक. प्रत्येक कथा नवविवाहिता’क जीवन सँघर्ष केँ प्रदर्षित करैत अछि. आशा अछि पाठकगण एहि पोथी’क स्वागत करताह. --आदि यायावर |
यैह पोथी’क सँ लेल किछु वाक्य...हुनकर कनियाँ सँ आब रहल नहि गेलन्हि, ओ बब्लू'क छाती में मुँह नुकाय जोर जोर सँ कानय लागलीह। बिल्कुल बच्चा'क तरहें। हुनकर नोर में कोनो वैमनस्यता नहि छल ओ सुख'क नोर छल जकरा तर्क द्वारा कखनो साबित नहि कयल जा सकैत छल। कहय लगलीह, " ई हमर दाम्पत्य जीवनक शुरुआत थीक, आ ई पूजा ते जीवन में एक्के बेर होइत छैक, आ ओहो दम्पत्य जीवनक आ ओकर बाद अपन खुशहाली लेल। एहेन एहेन नौकरी ते जीवन में कतेको आयत... मुदा बरिसाति ते एक्के बेर ने। हमरा अन्दर में एत्तेक क्षमता नहि अछि जे सामाजिक ई मान्यता के पार क' जायब..." --आदि यायावर |