बस अपन वेग सँ जा रहल छल. आ गार्गी अपन भूत मे हेराएल छलीह. याद एलन्हि जे कोना प्रभाकर’क प्रेम प्रस्ताव केँ ठोकर मारला’क बाद मे राति भरि नीन्द नहि आएल छलन्हि. मोन छलन्हि जे दोसर बेर कहला पर ओ मानि जेतीह. किछु दिन बाद दुनू लोकनि एक दोसर’क लेल समर्पित भऽ गेल. गार्गी केँ समाज’क दोसर पक्ष, जे एहेन प्रेम सँ घृणा करैत छथि, सँ बिल्कूल परवाह नहि भेलन्हि. मोन मे एकटा अलगे विश्वास उत्पन्न भऽ गेलन्हि जे प्रेम मे विश्वास नहि राखब एकटा अन्धविश्वास थीक. प्रेम’क सत्ता मे अविश्वास राखए वाला लोक समाज केर प्रगतिक एहने दुश्मन होइत छैक जेना कोनो अन्धविश्वासी. ओ एहेन समय छल जखन हुनकर जीवन बदलि रहल छल. दुनियाँक प्रत्येक चीज हुनका नीक लागए लागलन्हि. अपन माँ बाबूजी सँ बेसी बात करैथ. एकोटा क्लास बँक नहि करैथ. हास्टल’क रुम’क बालकोनी मे असगरे घँटो धरि बैसल हवा सँ हिलैत गाछ-बृक्ष देखैथ, हास्टल’क खाना हुनका अपेक्षाकृत बेसी नीक लागन्हि, भोरे सुति उठि कसरत करैथ, कालेज क्लास’क बाद अनेरोँ सीढ़ी पर उपर नीचा करैथ, राति केँ सुतए सँ पहिने मोने मोन हनुमान चलीसा पढ़ैथ, सबटा असाइनमेन्ट टाइम पर करैथ. प्रेम हुनकर जीवन मे एकटा मधूर सँगीत नेने आएल छलन्हि. हुनकर दैनिक-चर्या केँ बदलि गेल छल, ओ खुदे बदलि गेल छलीह, एकटा बच्ची सँ सम्पूर्ण जिम्मेदार स्त्री’क रुप मे. मोन मे होइत छलन्हि जे नहि जानि किएक लोक प्रेम केँ खराप बुझैत छैक.